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Showing posts from August, 2022

भगवान शब्द - सुरजानाथ।

सत सनातन, नकली सनातन, आस्तिक, नास्तिक, भगवान व मोमिन का सच : सारे वेदों में, केवल ऋग्वेद में एक बार "भगवान" शब्द आया है (10/60/12), वह भी भाग्यशाली (lucky) इस अर्थ में; तृष्णा के जलने (भग्ग+वान) के अर्थ में नहीं। व आखिरी अथर्ववेद (भाष्य) में एक बार सनातन शब्द आया है। सो प्रोपागंडा के पिछे के सत-असत को जाने। वर्णाश्रम, उच-निचता, पाप-पुण्य योनी आदि बुद्धिभ्रम करनेवाली, मांत्रिक-तांत्रिक कर्मकांडी, लोक-परलोक आस विचार की पैदाइश, कालांध वैदिक धंधा परंपरा, जिसमें मानवीय गरिमा की अवमानना है, कब व कैसे सनातन हो गयी? और अब हिंदू? भग्ग रागो भग्ग दोसो भग्ग मोहो अनासवो। भग्गस्स पापका धम्मा भगवा तेन उच्चति।। — भगवान बुद्ध। भग्ग (भग्न) + वान (तृष्णा) से भगवा भगवान इति। सनातन = कुदरतन, अपने आप से, विचार की पैदाइश नहीं, eternal, laws of nature by itself, सार्वजनीन, सार्वभौम। सनातन की बात बुद्ध बारिकि से अनेकों बार करते है। उदाहरण के लिए — न हि वेरेन वेरानि, सम्मन्तीधा कुदचनम्। अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सनंतनो। — बुद्ध। सनातन, भगवान शब्दों बाबत जाने कि, ये बुद्ध ने गढे व व्याख्यायित कर इस्त...

जन्माष्टमी मटकी।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित मटका फोड़ की लीला बुद्धिज्म के इसी आर्ट से प्रभावित है.... ( सौजन्य: भरहुत स्तूप )

पाली से संस्कृत।

पिजिन भाषाओं का विकास ऐसे दो या दो से अधिक समुदायों के बीच में होता है, जिनकी भाषाएँ एक - दूसरे के लिए अबूझ होती हैं, किंतु आपसी संवाद कायम करना जरूरी हो जाता है। ऐसा व्यापार, शासन, धर्म प्रचार या अन्य किसी कारण से होता है। बतौर उदाहरण व्यापार को लीजिए। व्यापार के उद्देश्य से चीन में पिजिन इंग्लिश का जन्म हुआ, जिसमें शब्द तो अंग्रेजी के हैं, मगर ध्वनि - प्रक्रिया और व्याकरण चीनी का है। व्यापारिक दृष्टिकोण से ही भूमध्य - सागर के बंदरगाहों पर बतौर पिजिन भाषा सबीर का जन्म हुआ, जिसमें अरबी और यूरोपीय भाषाओं का मिश्रण है। पिजिन भाषाओं का जन्म धर्म या प्रशासनिक कारणों से भी होता है। 13 वीं सदी में जब उत्तर भारत में तुर्क साम्राज्य स्थापित हुआ, तब बतौर पिजिन भाषा उर्दू की नींव पड़ी और 6 ठी सदी ईसा पूर्व में जब पश्चिमोत्तर भारत में ईरानी साम्राज्य स्थापित हुआ, तब बतौर पिजिन भाषा संस्कृत की नींव पड़ी। जब किसी पिजिन भाषा की नींव पड़ती है, तब वह कामचलाऊ होती है। वह सिर्फ स्थूल भावों का संप्रेषण करती है। उसमें गंभीर दर्शन, विज्ञान या साहित्य की रचना संभव नहीं होती है। पिजिन भाषाओं को भाषा बनने में...

कस्सप बुद्ध।

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कस्सप बुद्ध के गाँव की खोज कस्सप बुद्ध ठीक गौतम बुद्ध से पहले के बुद्ध थे। कस्सप बुद्ध के गाँव में प्राप्त साक्ष्य के अनुसार सबसे पहले सम्राट अशोक गए थे। वहाँ उन्होंने उनकी स्मृति में दो स्तूप बनवाए थे। ये बात ह्वेनसांग ने बताई है। फिर पाँचवी सदी में कस्सप बुद्ध के जन्म - स्थल पर फाहियान पहुँचे। उन्होंने कस्सप बुद्ध के गाँव का नाम " टू - वेई " बताया है। फिर सातवीं सदी में कस्सप बुद्ध के गाँव ह्वेनसांग पहुँचे। उन्होंने उनका गाँव श्रावस्ती से 16 ली की दूरी पर उत्तर - पश्चिम में बताया है। आधुनिक काल में कस्सप बुद्ध के गाँव की खोज में कनिंघम पहुँचे। उन्होंने 1863 एवं 1876 में दो बार उस गाँव की यात्रा की। कनिंघम ने फाहियान द्वारा कस्सप बुद्ध के बताए गए गाँव " टू - वेई " की पहचान टंडवा गाँव के रूप में की। यह टंडवा गाँव श्रावस्ती से पश्चिम 14 किलोमीटर की दूरी पर है, जो काफी हद तक चीनी यात्रियों के बताए गए स्थान से मेल खाता है। कनिंघम ने देखा कि टंडवा गाँव ईंट के खंडहरों के बीच बसा है। गाँव के उत्तर - पश्चिम में उन्होंने 800 फीट लंबा और 300 फीट चौड़ा ईंट के खंडहरों का टीला ...

लाइब्रेरी।

बौद्ध विश्वविद्यालय अलेक्जेंड्रिया को किसने जलाया था?  नालंदा की तरह अलेक्जेंड्रिया इजिप्त की बड़ी लायब्रेरी थी और मध्य आशिया तथा पश्चिमी जगत का महत्वपूर्ण विश्वविद्यालय था| इस विश्वविद्यालय का निर्माण थेरापुटी (Therapeuty) और इस्सेन (Essene) नामक बौद्ध भिक्खुओं ने किया था, जिन्हें सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा था| नालंदा विश्वविद्यालय की तरह अलेक्जेंड्रिया बौद्ध विश्वविद्यालय भी अत्यंत विशाल था और उसमें दुनिया के सभी ग्रंथ सुरक्षित रखें गये थे|  ख्रिश्चन धर्म का निर्माण बौद्ध थेरापुटी और इस्सेन प्रचारकों ने किया था, जिसमें बौद्ध भिक्खु बर्णबा और सेंट पौल का महत्वपूर्ण योगदान था| लेकिन बौद्ध धर्म से ख्रिश्चन धर्म अलग दिखाने के लिए कुछ कट्टरपंथी ख्रिश्चन बिशप लोगों ने सन 325 में निसिया (Nicaea) शहर में पहली ख्रिश्चन धर्म सभा आयोजित कर दी थी, जिसमें बौद्ध धर्म से संबंधित सभी बातों को पाखंड ( Heresy) घोषित कर दिया गया और ख्रिश्चन धर्म को बौद्ध धर्म से अलग और स्वतंत्र धर्म घोषित किया गया| बौद्ध धर्म और ख्रिश्चन धर्म को जोडनेवाले असंख्य सबुत ग्रंथों के रूप में अले...

हनुमान।

बोधिसत्व हनुमान वास्तव में बोधिसत्व वज्रपाणि है|         तथागत बुद्ध जब परिलेयक वन में निवास करते हैं, तब बंदर उन्हें मधु अर्थात शहद खिलाकर उनका सम्मान करते हैं ऐसी जानकारी हमें कपिचित जातक कथा में मिलती है| अनामक जातक कथा बताती है कि जब बोधिसत्व  राजकुमार अपनी महाराणी के साथ वन में विहार करते हैं, तभी समंदर का दुष्ट नागराजा उस महाराणी को उठाकर समंदर में अपने टापू पर भगाकर ले जाता है| महाराणी को मुक्त करने के लिए बोधिसत्व वानरराज और उनके सेना की मदद लेते हैं और महाराणी को नागराजा से मुक्त कर वापिस अपनी राजधानी लाते है| इस तरह, हनुमान से संबंधित कथाएं सबसे पहले हमें बौद्ध जातक कथाओं में मिलतीं हैं| भरहुत में बोधिसत्व वानर बुद्ध को मधु दे रहे हैं ऐसा शिल्प अंकित मिलता है| सन 251 में सोगदियन बौद्ध भिक्खु सेंघुई ने अनामक जातक कथा को चीनी भाषा में "लुई तु चि चिंग" नाम से अनुवादित कर दिया था| इससे पता चलता है कि, बोधिसत्व वानर का सबसे पहला जिक्र बौद्ध साहित्य में मिलता है|                          ...

शिव, त्रिशूल।

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बॊधिसत्व की मूर्ति और त्रिशूल (त्रिरत्न का प्रतीक) का रहस्य! : ```````````````````````````````````````````````````` अब आप ही बताइए; कि कौन किसकी नकल कर रहा है? बोधिसत्त्व की प्रतिमा के हाथ में त्रिरत्न का प्रतीक त्रिफलक को दर्शाया गया है; जिसे बाद में त्रिशूल बनाकर शिव के हाथ में दे दिया गया?   बोधिसत्त्व के हाथ में आप जो तीन फलक देख रहे हैं, यह त्रिशूल नहीं है; बल्कि "बुद्ध, धम्म और संघ" नामक तीन बुद्ध 'धम्म' के प्रतीक हैं। ये स्तूपों, विहारों, चैत्य आदि पर दिखाई पड़ते हैं। अब आप ही बताईये! तीसरी शताब्दी में बने इन धम्म प्रतीकों को कैसे और कब चुराया गया? 'सिव' नामक शब्द बुद्ध के लिए प्रयोग में आया, जिसका अर्थ 'कल्याणकारी' है। विश्व में तथागत ही 'कल्याणकारी' के रूप में जाने जाते हैं, जबकि कालांतर में भारत से बुद्ध धम्म लुप्त होने के बाद शिव की उत्पत्ति हुई और शैव और वैष्णव सम्प्रदाय बनें, हिन्दू धर्म कहीं भी दिखाई नही दिया? जिसे आज शंकर, भोला, नीलकंठ, महादेव आदि कहा जाता है। देखा जाए तो भारत में बुद्ध को ही महादेव यानि देने वाले सबसे बड़े देव महा...