बोधिसत्व हनुमान वास्तव में बोधिसत्व वज्रपाणि है| तथागत बुद्ध जब परिलेयक वन में निवास करते हैं, तब बंदर उन्हें मधु अर्थात शहद खिलाकर उनका सम्मान करते हैं ऐसी जानकारी हमें कपिचित जातक कथा में मिलती है| अनामक जातक कथा बताती है कि जब बोधिसत्व राजकुमार अपनी महाराणी के साथ वन में विहार करते हैं, तभी समंदर का दुष्ट नागराजा उस महाराणी को उठाकर समंदर में अपने टापू पर भगाकर ले जाता है| महाराणी को मुक्त करने के लिए बोधिसत्व वानरराज और उनके सेना की मदद लेते हैं और महाराणी को नागराजा से मुक्त कर वापिस अपनी राजधानी लाते है| इस तरह, हनुमान से संबंधित कथाएं सबसे पहले हमें बौद्ध जातक कथाओं में मिलतीं हैं| भरहुत में बोधिसत्व वानर बुद्ध को मधु दे रहे हैं ऐसा शिल्प अंकित मिलता है| सन 251 में सोगदियन बौद्ध भिक्खु सेंघुई ने अनामक जातक कथा को चीनी भाषा में "लुई तु चि चिंग" नाम से अनुवादित कर दिया था| इससे पता चलता है कि, बोधिसत्व वानर का सबसे पहला जिक्र बौद्ध साहित्य में मिलता है| ...
बॊधिसत्व की मूर्ति और त्रिशूल (त्रिरत्न का प्रतीक) का रहस्य! : ```````````````````````````````````````````````````` अब आप ही बताइए; कि कौन किसकी नकल कर रहा है? बोधिसत्त्व की प्रतिमा के हाथ में त्रिरत्न का प्रतीक त्रिफलक को दर्शाया गया है; जिसे बाद में त्रिशूल बनाकर शिव के हाथ में दे दिया गया? बोधिसत्त्व के हाथ में आप जो तीन फलक देख रहे हैं, यह त्रिशूल नहीं है; बल्कि "बुद्ध, धम्म और संघ" नामक तीन बुद्ध 'धम्म' के प्रतीक हैं। ये स्तूपों, विहारों, चैत्य आदि पर दिखाई पड़ते हैं। अब आप ही बताईये! तीसरी शताब्दी में बने इन धम्म प्रतीकों को कैसे और कब चुराया गया? 'सिव' नामक शब्द बुद्ध के लिए प्रयोग में आया, जिसका अर्थ 'कल्याणकारी' है। विश्व में तथागत ही 'कल्याणकारी' के रूप में जाने जाते हैं, जबकि कालांतर में भारत से बुद्ध धम्म लुप्त होने के बाद शिव की उत्पत्ति हुई और शैव और वैष्णव सम्प्रदाय बनें, हिन्दू धर्म कहीं भी दिखाई नही दिया? जिसे आज शंकर, भोला, नीलकंठ, महादेव आदि कहा जाता है। देखा जाए तो भारत में बुद्ध को ही महादेव यानि देने वाले सबसे बड़े देव महा...
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